क्या मई में घटेंगे पेट्रोल-डीज़ल के दाम?
भारत पिछले तीन महीनों से तेल उत्पादन करने वाले देशों के संगठन ओपेक और इसके सबसे अहम सदस्य सऊदी अरब पर लगातार ज़ोर देता आ रहा है कि ये देश तेल का उत्पादन बढ़ाएँ, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में तेल का भाव कम हो और दुनिया में तेल के तीसरे सबसे बड़े आयातक भारत को थोड़ी राहत मिले.
गुरुवार को ओपेक देशों ने एक वर्चुअल कॉन्फ़्रेंस में फ़ैसला किया कि तेल का उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा. लेकिन इस फ़ैसले से भारत पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है.
भारत के तेल और गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इन दिनों विधानसभा चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, इसलिए उनकी प्रतिक्रिया अब तक सामने नहीं आई है.

लेकिन सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के आर्थिक मामलों के प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल कहते हैं कि वो इस फ़ैसले से संतुष्ट हैं लेकिन पूरी तरह से नहीं.
वो कहते हैं, "भारत सरकार उत्पादन बढ़ाने के लिए उन पर दबाव बनाए हुए थी, लेकिन ये बढ़ोतरी अभी भी कम है. हालाँकि हम इस फ़ैसले से ख़ुश हैं, लेकिन हमारी सरकार तेल उत्पादन को चरणबद्ध तरीक़े से नहीं बल्कि तेज़ी से बढ़ाने की माँग करती रही है."
उत्पादन तीन चरणों में बढ़ाया जाएगा, यानी मई और जून में 350,000 बैरल प्रति दिन और जुलाई में 450,000 बैरल प्रति दिन के हिसाब से तेल का उत्पाद बढ़ाया जाएगा.
लेकिन सवाल ये है कि क्या भारत को अब मई के महीने से सस्ते दाम में तेल मिलेगा? और दूसरा सवाल ये कि क्या देश के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीज़ल के दाम में कमी आएगी?
विशेषज्ञ कहते हैं कि मई से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के भाव में कमी आने की पूरी संभावना है. लेकिन उनका कहना था कि इसका सीधा असर देश के आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा- ये कहा नहीं जा सकता.
मुंबई में ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ विवेक जैन के मुताबिक़, "अगर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल का भाव गिरा और केंद्र और राज्यों ने एक्साइज ड्यूटी नहीं बढ़ाई, तो पेट्रोल और डीज़ल का दाम पेट्रोल पंप पर भी गिरेगा."महामारी से हुए नुक़सान के बाद भारत की अर्थव्यवस्था अब विकास की पटरी पर आ गई है, लेकिन विकास की गति को बनाए रखने और इसे आगे बढ़ाने के लिए कच्चे तेल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद की सस्ते दामों पर उपलब्धता ज़रूरी है.
भारत अपनी ज़रूरत का 85 प्रतिशत तेल और पेट्रोलियम उत्पाद आयात करता है. पिछले साल इसने इनके आयात पर 120 अरब डॉलर ख़र्च किए थे. गुरुवार को ओपेक देशों के तेल के उत्पाद को बढ़ाने के फ़ैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल का दाम थोड़ा ऊपर गया, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि मई के महीने से जब तेल का उत्पादन बढ़ेगा, तो इसका भाव नीचे आएगा.
अमेरिका का दबाव था कि तेल का उत्पादन अभी ना बढ़ाया जाए, क्योंकि इससे अमेरिका के तेल के निर्यात को नुक़सान हो सकता है. सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान ने भी कॉन्फ़्रेंस से पहले तेल का उत्पाद न बढ़ाने की सलाह दी थी, जिसके कारण उन पर आरोप लगा कि वो अमेरिका के दबाव में आकर उत्पादन को बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं.
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